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अमेरिका-ईरान शांति समझौता 2026 | UPSC Current Affairs

18 June 20261 viewsSave as PDF
अमेरिका-ईरान शांति समझौता 2026 | UPSC Current Affairs
  • UPSC Current Affairs 2026
  • अमेरिका-ईरान शांति समझौता 2026

14-सूत्रीय MoU, युद्ध का इतिहास, होर्मुज़ संकट, परमाणु विवाद और भारत पर प्रभाव — सम्पूर्ण विश्लेषण

🗓 अपडेटेड: 17 जून 2026📋 GS Paper II & III📌 Prelims + Mains दोनों के लिए

GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंधGS Paper III — आर्थिक सुरक्षा / ऊर्जाCLAT Legal ReasoningEssay Paper — वैश्विक शांति

  • क्यों चर्चा में
  • परिचय एवं समाचार का महत्व
  • 14-15 जून 2026 को अमेरिका और ईरान ने एक ऐतिहासिक
  • 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU)

पर हस्ताक्षर किए, जो 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए भयावह युद्ध को समाप्त करने की दिशा में पहला ठोस कदम है। यह समझौता 17 जून 2026 को G-7 शिखर सम्मेलन (Evian, France) के दौरान सार्वजनिक किया गया।

पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुए इस समझौते में

होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पुनः खोलना, परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता, प्रतिबंधों की समाप्ति और ईरान के जमे हुए संपत्तियों की वापसी

जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं। इसे दशकों की सबसे बड़ी अमेरिका-ईरान कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।

⚡ परीक्षा की दृष्टि से महत्व

यह विषय UPSC 2026-27 के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य, JCPOA, परमाणु अप्रसार संधि (NPT), IAEA, स्नैपबैक तंत्र, भारत की ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह और INSTC — ये सभी मुद्दे एक साथ इस घटना में उभरते हैं।

  • पृष्ठभूमि
  • अमेरिका-ईरान संबंधों का इतिहास

अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों की यात्रा मित्रता से शत्रुता तक की दर्दनाक कहानी है। इसे समझे बिना वर्तमान संकट को नहीं समझा जा सकता।

  • 1953
  • CIA तख्तापलट (Operation Ajax)

अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर ईरान के लोकतांत्रिक रूप से चुने प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेक को हटाया और शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी को सत्ता में बिठाया। यही ईरानी जनता के अमेरिका-विरोध का बीज था।

  • 1979
  • इस्लामी क्रांति और अमेरिकी दूतावास बंधक संकट

इमाम खुमैनी के नेतृत्व में इस्लामी क्रांति ने शाह को सत्ता से बेदखल किया। नवंबर 1979 में ईरानी छात्रों ने तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास में 52 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाए रखा। इसके बाद अमेरिका ने ईरान से राजनयिक संबंध तोड़ लिए — जो आज तक बहाल नहीं हुए हैं।

  • 1980–1988
  • ईरान-इराक युद्ध में अमेरिकी भूमिका

अमेरिका ने गुप्त रूप से इराक के सद्दाम हुसैन का समर्थन किया, जिसमें रासायनिक हथियारों की जानकारी देना भी शामिल था — बाद में यह सार्वजनिक हुआ।

  • 2002
  • ईरान का गुप्त परमाणु कार्यक्रम उजागर

विपक्षी समूह ने नातांज़ और अराक में गुप्त परमाणु सुविधाओं का खुलासा किया। अमेरिका ने “Axis of Evil” में ईरान को शामिल किया।

  • 2006–2012
  • संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध एवं साइबर युद्ध

UNSC ने ईरान पर छः प्रस्तावों के ज़रिए प्रतिबंध लगाए। अमेरिका और इजराइल ने स्टक्सनेट साइबर वायरस से नातांज़ परमाणु संयंत्र को क्षतिग्रस्त किया।

  • जुलाई 2015
  • JCPOA — ओबामा युग का परमाणु समझौता

P5+1 (अमेरिका, UK, फ्रांस, रूस, चीन + जर्मनी) और ईरान के बीच 109 पृष्ठ का ऐतिहासिक समझौता — ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन को दो-तिहाई घटाएगा, IAEA निरीक्षण स्वीकार करेगा — बदले में प्रतिबंध हटेंगे और 100 अरब डॉलर की जमी संपत्ति मिलेगी।

  • मई 2018
  • ट्रंप का JCPOA से बाहर निकलना (Maximum Pressure)

ट्रंप ने JCPOA को “अब तक की सबसे बुरी डील” कहकर अमेरिका को बाहर किया। 1,500 से अधिक प्रतिबंध लगाए गए — सेंट्रल बैंक, NIOC, शिपिंग लाइनें सब निशाने पर। ईरान ने जवाब में यूरेनियम संवर्धन फिर शुरू किया।

  • जनवरी 2020
  • जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या

ट्रंप के आदेश पर बगदाद में IRGC के कुद्स फोर्स कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी को ड्रोन हमले में मार गिराया। ईरान ने इराक में अमेरिकी अड्डों पर मिसाइलें दागीं।

  • अक्टूबर 2025
  • स्नैपबैक प्रतिबंध और Twelve-Day War

UK, फ्रांस, जर्मनी ने JCPOA के तहत स्नैपबैक तंत्र सक्रिय किया। जून 2025 में इजराइल-अमेरिका ने ईरान के परमाणु स्थलों पर हवाई हमले किए — तथाकथित “बारह दिवसीय युद्ध”।

  • 28 फरवरी 2026
  • Operation Epic Fury — युद्ध का आरंभ

अमेरिका और इजराइल ने 12 घंटे में 900 से अधिक हमले किए। सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए। ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद किया, खाड़ी देशों पर मिसाइल दागे — वैश्विक ऊर्जा संकट उत्पन्न हुआ।

  • 8 अप्रैल 2026
  • पाकिस्तान-मध्यस्थता में युद्धविराम

पाकिस्तानी PM शहबाज़ शरीफ की मध्यस्थता में 14-दिवसीय युद्धविराम। 21 अप्रैल को ट्रंप ने इसे अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया।

  • 14-15 जून 2026
  • 14-सूत्रीय MoU पर हस्ताक्षर

ट्रंप और ईरानी अधिकारियों ने MoU पर हस्ताक्षर किए। 17 जून को G-7 में सार्वजनिक किया गया। स्विट्ज़रलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह प्रस्तावित।

  • 2026 युद्ध
  • Operation Epic Fury — युद्ध का विश्लेषण
  • 🔴 युद्ध के कारण (अमेरिकी दृष्टिकोण)

ईरान का परमाणु कार्यक्रम पुनः सक्रिय — IAEA ने 60% तक यूरेनियम संवर्धन की पुष्टि की, जो हथियार-ग्रेड के निकट था

दिसंबर 2025-जनवरी 2026 में ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध और दमन (30,000 मौतें बताई गईं) — ट्रंप का गुस्सा

Hezbollah, Hamas, Houthis के माध्यम से ईरानी “Axis of Resistance” से खाड़ी देशों पर खतरा

  • इजराइल की सुरक्षा — नेतन्याहू का “अभी या कभी नहीं” दृष्टिकोण
  • पहलू
  • विवरण
  • ऑपरेशन नाम (अमेरिका)
  • Operation Epic Fury
  • ऑपरेशन नाम (इजराइल)
  • Operation Lion’s Roar
  • आरंभ तिथि
  • 28 फरवरी 2026
  • प्रमुख लक्ष्य
  • परमाणु स्थल, सैन्य अड्डे, नेतृत्व (खामेनेई की हत्या)
  • पहले 12 घंटे
  • 900+ हवाई हमले
  • ईरान की प्रतिक्रिया

मिसाइल + ड्रोन — UAE, सऊदी, कतर, बहरीन, इराक पर हमले; होर्मुज़ बंद

  • आर्थिक प्रभाव
  • तेल $100/बैरल पार; होर्मुज़ से 20% वैश्विक तेल प्रवाह ठप
  • नया सर्वोच्च नेता
  • मोज्तबा खामेनेई (मार्च 2026 में नियुक्त)
  • मध्यस्थ
  • पाकिस्तान (मुख्य), कतर, ओमान

14-सूत्रीय MoUWhat’s in the US-Iran agreement? http://What’s in the US-Iran agreement? BBC https://www.bbc.com › news › articles

MoU के 14 बिंदु — विस्तृत विवरण

17 जून 2026 को एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने G-7 में पत्रकारों को MoU का पाठ पढ़ा। यह

अंतिम शांति समझौता नहीं

बल्कि एक प्रारंभिक ढांचा है जो 60 दिनों की वार्ता का रास्ता खोलता है।

  • बिंदु 1
  • ⚔️ युद्ध की समाप्ति

अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी सभी मोर्चों पर — लेबनान सहित — तत्काल और स्थायी युद्धविराम घोषित करते हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से परहेज़ करेंगे।

  • बिंदु 2
  • 🚢 अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की समाप्ति

अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी तत्काल हटाएगा और अपनी नौसैनिक सेनाएं क्षेत्र से पीछे करेगा।

  • बिंदु 3
  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य — पुनः खोलना

ईरान 60 दिनों के लिए वाणिज्यिक जहाजों को बिना शुल्क के दोनों दिशाओं में आवागमन देगा। 30 दिनों में खदानें हटाई जाएंगी। भविष्य का प्रशासन ओमान और खाड़ी देशों से वार्ता से तय होगा।

  • Strait of Hormuz Crisis and Global Energy Shock
  • बिंदु 4
  • 🏗️ $300 अरब पुनर्निर्माण कोष

अमेरिका क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ईरान के लिए कम-से-कम 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास कोष बनाएगा। विवरण 60 दिनों में तय होगा।

  • बिंदु 5
  • 🛢️ तेल निर्यात वेवर

MoU पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिकी ट्रेज़री ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल और संबंधित सेवाओं (बैंकिंग, बीमा, परिवहन) के लिए तत्काल वेवर जारी करेगा।

  • बिंदु 6-7
  • 💰 प्रतिबंधों की समाप्ति

अंतिम समझौते में अमेरिका UN सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों, IAEA बोर्ड प्रस्तावों और सभी अमेरिकी एकपक्षीय प्रतिबंधों को समाप्त करेगा — एक सहमत अनुसूची के अनुसार।

  • बिंदु 8
  • ⚛️ परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिज्ञा

ईरान पुनः पुष्टि करता है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। यूरेनियम के समृद्ध भंडार को IAEA निगरानी में on-site down-blending (पतला करना) से निपटाया जाएगा।

  • बिंदु 9
  • 🔒 यथास्थिति का पालन

अंतिम समझौते तक दोनों पक्ष यथास्थिति बनाए रखेंगे — ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम नहीं बढ़ाएगा, अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा और क्षेत्र में अतिरिक्त सेनाएं नहीं भेजेगा।

  • बिंदु 10
  • 🏦
  • जमे हुए संपत्ति की वापसी

अमेरिका ईरान के जमे हुए और प्रतिबंधित कोष एवं संपत्ति पूर्णतः उपलब्ध कराएगा। प्रक्रिया 60 दिनों में तय होगी। ईरानी सेंट्रल बैंक इन फंड का उपयोगकर्ता निर्धारित करेगा। (अनुमानित: $25–100 अरब)

  • बिंदु 11
  • 🇱🇧 लेबनान और Hezbollah

MoU में लेबनान का उल्लेख तीन बार है — इजराइल लेबनान में युद्ध समाप्त करेगा। हालांकि Hezbollah के निशस्त्रीकरण का मुद्दा अभी भी अनसुलझा है।

  • बिंदु 12
  • 🔍 कार्यान्वयन तंत्र

MoU और अंतिम समझौते के अनुपालन की निगरानी के लिए एक संयुक्त कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा।

  • बिंदु 13-14
  • 🗓 60 दिन की वार्ता

युद्धविराम, नाकाबंदी हटाने, होर्मुज़ उपायों, तेल वेवर और संपत्ति रिहाई शुरू होते ही दोनों देश अंतिम समझौते की बातचीत शुरू करेंगे। मुख्य मुद्दे: परमाणु संवर्धन की सीमा, मिसाइल कार्यक्रम, प्रतिबंध सूची।

  • ⚠️ MoU के अनसुलझे मुद्दे
  • यूरेनियम संवर्धन अवधि:

अमेरिका 20 साल की सीमा चाहता है, ईरान 10 साल से ज़्यादा नहीं देना चाहता

  • होर्मुज़ टोल:
  • 60 दिन बाद ईरान टोल लगाएगा या नहीं — विवादास्पद
  • IAEA निरीक्षण:

IAEA प्रमुख ग्रॉसी ने कहा — बिना निरीक्षण के कोई भी समझौता “भ्रम” होगा

  • इजराइल का रुख:
  • इजराइल इस वार्ता से बाहर रहा; नेतन्याहू और ट्रंप के बीच मतभेद
  • Hezbollah का निशस्त्रीकरण:
  • अभी भी अनिर्णीत
  • भू-रणनीति
  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य — वैश्विक महत्व
  • तथ्य
  • विवरण
  • स्थान
  • फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच
  • तटीय देश
  • ईरान (उत्तर), ओमान (दक्षिण)
  • न्यूनतम चौड़ाई
  • लगभग 39 किमी
  • वैश्विक तेल प्रवाह
  • लगभग 20% (20–21 मिलियन बैरल/दिन)
  • LNG व्यापार
  • विश्व के कुल LNG का ~25%
  • प्रमुख उपयोगकर्ता
  • सऊदी अरब, UAE, कुवैत, इराक, कतर — भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया
  • भारत के लिए
  • भारत के लगभग 40–45% कच्चे तेल का आयात इसी रास्ते से
  • 🔴 बंद होने का आर्थिक प्रभाव

होर्मुज़ बंद होने के बाद: तेल $100/बैरल पार; भारत के LPG आपूर्ति पर गंभीर दबाव; Maersk ने सुएज़ ट्रांजिट निलंबित किया; वैश्विक शिपिंग मार्ग बदले; IMF ने वैश्विक विकास अनुमान घटाया।

  • तुलनात्मक विश्लेषण
  • JCPOA (2015) बनाम MoU (2026) — तुलना
  • पहलू
  • JCPOA 2015
  • MoU 2026
  • स्वरूप
  • विस्तृत 109-पृष्ठ राजनीतिक प्रतिबद्धता
  • 14-बिंदु प्रारंभिक ढांचा
  • पक्षकार
  • P5+1 + EU + ईरान
  • अमेरिका + ईरान (पाकिस्तान, कतर मध्यस्थ)
  • संवर्धन सीमा
  • 3.67% तक (15 वर्ष)
  • अभी तय नहीं — वार्ता में
  • IAEA निरीक्षण
  • व्यापक, Additional Protocol
  • अभी तय नहीं
  • प्रतिबंध राहत
  • चरणबद्ध
  • तेल वेवर तत्काल; बाकी बाद में
  • जमी संपत्ति
  • ~$100 अरब
  • $25–100 अरब (प्रक्रिया तय होनी)
  • सूर्यास्त खंड
  • हाँ (10-15 साल)
  • वार्ता में
  • मिसाइल कार्यक्रम
  • शामिल नहीं
  • भविष्य की वार्ता में
  • होर्मुज़
  • उल्लेख नहीं
  • मुख्य बिंदु
  • भारत पर प्रभाव
  • 🇮🇳 भारत की भू-रणनीतिक स्थिति और शांति समझौते का प्रभाव
  • ⚡ ऊर्जा सुरक्षा

भारत अपनी 90% से अधिक कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। खाड़ी देश प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। होर्मुज़ खुलने से तेल कीमतें गिरेंगी — भारत के लिए राहत। युद्ध के दौरान LPG आपूर्ति पर गंभीर दबाव था।

🚢 चाबहार बंदरगाह

भारत ने 2024 में 10 वर्षीय परिचालन समझौते पर हस्ताक्षर किए। युद्ध के दौरान यह बंदरगाह सक्रिय युद्धक्षेत्र में था। शांति से भारत का अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का मार्ग सुरक्षित होगा।

🛤️ INSTC कॉरिडोर

International North-South Transport Corridor: मुंबई → चाबहार → मध्य एशिया → रूस — युद्ध के कारण यह महत्वाकांक्षी परियोजना जोखिम में थी। शांति से INSTC की व्यावहारिकता बहाल होगी।

👥 भारतीय प्रवासी

खाड़ी में लगभग 90 लाख से 1 करोड़ भारतीय प्रवासी हैं। युद्ध के दौरान उनकी सुरक्षा और धन-प्रेषण (remittances) दोनों जोखिम में थे। शांति से स्थिति सामान्य होगी।

⚖️ रणनीतिक स्वायत्तता

भारत ने युद्ध के दौरान “रणनीतिक तटस्थता” बनाए रखी। भारतीय नौसैनिक पोत शिवालिक ने LPG टैंकर को होर्मुज़ से पार कराया — यह भारत की कूटनीतिक सफलता थी।

📈 IMEC कॉरिडोर

India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) की व्यवहार्यता पर युद्ध से खतरा था। शांति से G-20 में घोषित यह कॉरिडोर फिर से संभव दिखता है।

  • परीक्षा हेतु शब्दावली
  • महत्वपूर्ण अवधारणाएं एवं शब्दावली
  • JCPOA

Joint Comprehensive Plan of Action — 2015 का परमाणु समझौता, P5+1 और ईरान के बीच

स्नैपबैक तंत्र

JCPOA का प्रावधान जिसके तहत ईरान उल्लंघन करे तो UN प्रतिबंध स्वचालित रूप से लागू हो जाते हैं

IAEA

International Atomic Energy Agency — परमाणु गतिविधियों की निगरानी करने वाली UN संस्था; मुख्यालय वियना

  • ब्रेकआउट टाइम
  • मौजूदा यूरेनियम भंडार से हथियार-ग्रेड सामग्री बनाने में लगने वाला समय
  • Down-Blending
  • उच्च-संवर्धित यूरेनियम को कम खतरनाक स्तर तक पतला करना
  • Additional Protocol

IAEA का विस्तारित निरीक्षण समझौता — ईरान ने 2021 में इसे निलंबित किया

  • Axis of Resistance
  • ईरान समर्थित गुटों का नेटवर्क — Hezbollah, Hamas, Houthis, PMF (इराक)
  • IRGC

Islamic Revolutionary Guard Corps — ईरान की विशेष सैन्य शाखा जो विदेशी अभियान चलाती है

Abraham Accords

2020 में UAE, बहरीन, मोरक्को द्वारा इजराइल को मान्यता; ट्रंप इसे सऊदी, पाकिस्तान तक विस्तार चाहते हैं

NPT

Nuclear Non-Proliferation Treaty — परमाणु अप्रसार संधि (1968); ईरान इसका हस्ताक्षरकर्ता है

  • ⚖️ Legal Reasoning — कानूनी आयाम
  • परीक्षार्थियों के लिए इस घटना से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न:
  • UN Charter का
  • अनुच्छेद 2(4)

किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बल प्रयोग पर रोक लगाता है

अनुच्छेद 51

— सशस्त्र हमले की स्थिति में आत्मरक्षा का अधिकार; लेकिन क्या फरवरी 2026 का हमला “pre-emptive” वैध था? — अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों में विवाद

  • संप्रभुता का सिद्धांत (Sovereignty)
  • — किसी देश के सर्वोच्च नेता की हत्या अभूतपूर्व और विवादास्पद

MoU एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि नहीं है — यह JCPOA की तरह “political commitment” की श्रेणी में है

UNCLOS

— होर्मुज़ जलडमरूमध्य “International Strait” है; ट्रांजिट पैसेज का अधिकार सभी देशों को है (Part III

  • UPPCS – Foundation Course 10-11 Months
  • Prelims
  • 📌 Prelims Facts

MoU पर हस्ताक्षर: 14-15 जून 2026; सार्वजनिक: 17 जून 2026 (G-7, Evian, France)

  • MoU में कुल बिंदु: 14
  • मध्यस्थ देश: पाकिस्तान (मुख्य) + कतर + ओमान
  • अमेरिकी वार्ताकार: Steve Witkoff (विशेष दूत) + Jared Kushner
  • पाकिस्तानी PM: शहबाज़ शरीफ ने पहले घोषणा की
  • 60 दिनों में मुख्य वार्ता: परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध, जमी संपत्ति
  • होर्मुज़ से वैश्विक तेल: लगभग 20%; LNG: लगभग 25%
  • जमी संपत्ति अनुमान: $25–100 अरब (स्रोत पर निर्भर)
  • पुनर्निर्माण कोष: न्यूनतम $300 अरब (क्षेत्रीय साझेदारों से)

युद्ध ऑपरेशन नाम: Operation Epic Fury (अमेरिका) / Operation Lion’s Roar (इजराइल)

  • खामेनेई की मृत्यु: 28 फरवरी / 1 मार्च 2026
  • नए सर्वोच्च नेता: मोज्तबा खामेनेई (मार्च 2026)
  • IAEA प्रमुख: Rafael Mariano Grossi
  • ईरान का यूरेनियम संवर्धन (युद्ध से पहले): 60% तक (हथियार-ग्रेड = 90%)

भारत का INS शिवालिक: LPG टैंकर को होर्मुज़ से पार कराया (मार्च 2026)

  • Trump, Iran’s President sign deal to end West Asia war
  • The Hinduhttps://www.thehindu.com › News › World
  • अभ्यास प्रश्न
  • Prelims MCQ
  • MCQ 1

जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित MoU के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

(a) यह एक अंतिम शांति संधि है जो तत्काल प्रभाव से लागू होती है

(b) इसमें ईरान पर सभी प्रतिबंध तत्काल समाप्त किए जाने का प्रावधान है

(c) यह 60 दिनों की वार्ता के लिए एक प्रारंभिक ढांचा है जिसमें होर्मुज़ को खोलना शामिल है

(d) इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अनुमोदित किया है

✅ उत्तर: (c) — यह एक MoU है, अंतिम संधि नहीं। प्रतिबंध अंतिम समझौते पर निर्भर हैं। UNSC ने अनुमोदित नहीं किया।

MCQ 2

होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

  • (a) यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है
  • (b) इसके तटवर्ती देश ईरान और ओमान हैं
  • (c) इससे विश्व का लगभग 20% कच्चा तेल गुज़रता है

(d) UNCLOS के तहत तटवर्ती देश इस पर पूर्ण संप्रभु नियंत्रण रखते हैं

✅ उत्तर: (d) — UNCLOS के Part III के तहत होर्मुज़ एक “International Strait” है जहाँ ट्रांजिट पैसेज का अधिकार सभी देशों को है; तटवर्ती देशों का पूर्ण नियंत्रण नहीं होता।

  • MCQ 3
  • JCPOA (2015) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  • 1. इसमें P5+1 और ईरान शामिल थे।
  • 2. इसमें ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर सीधे प्रतिबंध थे।
  • 3. ट्रंप प्रशासन ने 2018 में इससे अमेरिका को अलग किया।

कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 1 और 3
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

✅ उत्तर: (b) — कथन 2 असत्य है: JCPOA में मिसाइल कार्यक्रम पर सीधे प्रतिबंध नहीं थे, यही इसकी प्रमुख आलोचना थी।

MCQ 4

भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह के संदर्भ में, 2026 के US-ईरान युद्ध का भारत पर क्या प्रभाव था?

(a) भारत को चाबहार संचालन अधिकार रद्द करने पड़े

(b) बंदरगाह सक्रिय युद्धक्षेत्र में था, जिससे भारत का INSTC कॉरिडोर जोखिम में आया

  • (c) भारत ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर प्रतिबंध लगाए
  • (d) चाबहार को होर्मुज़ संकट से कोई प्रभाव नहीं पड़ा

✅ उत्तर: (b) — चाबहार युद्धक्षेत्र में था; INSTC भी जोखिम में था; भारत ने रणनीतिक तटस्थता बनाए रखी।

  • Mains उत्तर लेखन
  • 250 शब्द / 15 अंक — आदर्श उत्तर

प्रश्न: अमेरिका-ईरान 2026 MoU के प्रमुख प्रावधानों का विश्लेषण करें और इसके भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीति पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा करें। (15 अंक)

पृष्ठभूमि

28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त ऑपरेशन Epic Fury के बाद शुरू हुए युद्ध ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था चरमरा गई। 14-15 जून 2026 को 14-सूत्रीय MoU पर हस्ताक्षर इस संकट के समाधान की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

  • MoU के प्रमुख प्रावधान
  • (i)
  • सभी मोर्चों पर तत्काल युद्धविराम — लेबनान सहित;
  • (ii)
  • होर्मुज़ को 60 दिनों के लिए निःशुल्क वाणिज्यिक यातायात हेतु खोलना;
  • (iii)

ईरान के परमाणु हथियार न बनाने की पुनः प्रतिज्ञा तथा समृद्ध यूरेनियम भंडार को IAEA निगरानी में down-blending से नष्ट करना;

  • (iv)
  • तेल निर्यात वेवर तत्काल;
  • (v)
  • $300 अरब पुनर्निर्माण कोष;
  • (vi)
  • प्रतिबंधों की चरणबद्ध समाप्ति और $25–100 अरब जमी संपत्ति की वापसी।
  • भारत पर प्रभाव
  • सकारात्मक:

होर्मुज़ खुलने से भारत का तेल आयात सामान्य होगा; चाबहार बंदरगाह और INSTC कॉरिडोर की व्यावहारिकता बहाल; 90 लाख प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा; तेल की कीमतों में गिरावट से मुद्रास्फीति पर राहत।

चुनौतियां:

ईरान पर लंबित अनसुलझे परमाणु मुद्दे पुनः अस्थिरता का कारण बन सकते हैं; इजराइल की भागीदारी न होने से लेबनान में तनाव जारी।

निष्कर्ष

भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति इस संकट में परखी गई। MoU से भारत को तात्कालिक राहत मिलती है, परंतु दीर्घकालिक ऊर्जा विविधीकरण — नवीकरणीय ऊर्जा, रूसी तेल, अमेरिकी LNG — की रणनीति भी अपरिहार्य है। भारत को चाबहार में निवेश की सुरक्षा और INSTC के सक्रियण के लिए सक्रिय कूटनीति जारी रखनी होगी।

Essay Angle: “कूटनीति के बिना परमाणु अप्रसार केवल एक स्वप्न है।” — इस कथन के संदर्भ में US-ईरान MoU की विवेचना करें।

इस निबंध में निम्न पहलुओं को शामिल किया जा सकता है: NPT की सीमाएं; परमाणु अप्रसार की वैश्विक विफलताएं (उत्तर कोरिया, पाकिस्तान); JCPOA का उत्थान-पतन; 2026 युद्ध की अनिवार्यता और कूटनीतिक विकल्प; MoU की उपलब्धि और सीमाएं; IAEA की भूमिका; भारत का दृष्टिकोण।

  • वैश्विक प्रतिक्रिया
  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
  • देश/संस्था
  • प्रतिक्रिया
  • UN महासचिव (गुटेरेस)
  • “Critical step” — स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
  • G-7 (UK, फ्रांस, जर्मनी, इटली)

स्वागत; “ऐतिहासिक अवसर”; IAEA निरीक्षण, मिसाइल और प्रॉक्सी कार्यक्रम पर जोर

  • तुर्की (एर्दोगान)
  • “विश्व को इसकी ज़रूरत थी” — क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीद
  • रूस

“व्यापक समझौते” की मांग; पहले ईरान का संवर्धित यूरेनियम लेने की पेशकश की थी

  • चीन
  • युद्धविराम वार्ता में भागीदारी; स्वागत
  • UAE

होर्मुज़ खोलना “बिना शर्त” होना चाहिए; ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल पर चिंता

  • कतर
  • मध्यस्थ के रूप में उल्लेखनीय भूमिका; “टिकाऊ शांति” का आह्वान
  • इजराइल

नेतन्याहू वार्ता से बाहर; लेबनान में सेना “अनिश्चितकाल” रखने की घोषणा; ट्रंप से मुलाकात चाही

ईरान के भीतर

कट्टरपंथी विरोध में — “Araghchi ने हार स्वीकार की”; राष्ट्रीय एकजुटता का प्रभाव भी

  • आलोचनात्मक दृष्टि
  • MoU की सीमाएं और आगे की चुनौतियां
  • ⚠️ प्रमुख चुनौतियां
  • अनुपालन सत्यापन:

IAEA ईरान के क्षतिग्रस्त परमाणु स्थलों का निरीक्षण नहीं कर पाया — कोई भी समझौता बिना निरीक्षण “भ्रम” होगा (IAEA प्रमुख ग्रॉसी)

इजराइल का अनिश्चित रुख:

नेतन्याहू ने वार्ता में हिस्सा नहीं लिया; लेबनान में इजराइली कार्रवाई जारी

  • संवर्धन पर गतिरोध:
  • अमेरिका 20 साल, ईरान 10 साल — समझौता अनिश्चित
  • MoU बाध्यकारी नहीं:
  • JCPOA की तरह यह भी “political commitment” — संसदीय अनुमोदन नहीं
  • ईरानी कट्टरपंथी:
  • घर में विरोध — नेतृत्व पर दबाव
  • रिपब्लिकन आलोचना:
  • अमेरिकी सीनेटर क्रूज़: “पागलों को अरबों देना अच्छा विचार नहीं”
  • ✅ उपलब्धियां
  • दशकों की शत्रुता के बाद पहली बार प्रत्यक्ष अमेरिका-ईरान समझौता

होर्मुज़ खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में तत्काल राहत — तेल कीमतें तीन महीने के निचले स्तर पर

ईरान द्वारा यूरेनियम भंडार नष्ट करने की प्रतिबद्धता — “Major Win” (अमेरिकी अधिकारी)

  • पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका — दक्षिण एशियाई कूटनीति की नई पहचान
  • लेबनान युद्धविराम का प्रावधान
  • क्लैट एवं UPSC करंट अफेयर्स ब्लॉग
  • | अपडेटेड: 17 जून 2026 | सभी तथ्य सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित

GS Paper II • GS Paper III • CLAT Legal Reasoning • Essay Paper