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UPSC & UPPCS General Studies Paper – 2 (International Relations)
होर्मुज जलडमरूमध्य हाल के वर्षों में लगातार चर्चा में बना हुआ है क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और भू-राजनीति का केंद्र हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद से ईरान ने दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन चैनलों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से अवरुद्ध कर दिया है। विश्व के लगभग 20% तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आमतौर पर इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं और युद्ध के कारण वैश्विक ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्या है और कहाँ स्थित है?
उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से घिरा यह गलियारा – अपने प्रवेश और निकास बिंदु पर लगभग 50 किमी (31 मील) चौड़ा और अपने सबसे संकरे बिंदु पर लगभग 33 किमी चौड़ा – खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।
यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के टैंकरों के लिए पर्याप्त गहरा है, और इसका उपयोग मध्य पूर्व के प्रमुख तेल और एलएनजी उत्पादकों के साथ-साथ उनके ग्राहकों द्वारा भी किया जाता है।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (ईआईए) के अनुमानों के अनुसार, 2025 में होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल और तेल उत्पादों का परिवहन होगा। यह लगभग 600 अरब डॉलर (447 अरब पाउंड) मूल्य का ऊर्जा व्यापार है।
यह तेल केवल ईरान से ही नहीं बल्कि इराक, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे अन्य खाड़ी देशों से भी आता है।
वैश्विक एलएनजी का लगभग 20% हिस्सा भी इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जिसमें से अधिकांश कतर से आता है। अमेरिकी सरकार के अनुसार, 2024 में कतर ने इस जलडमरूमध्य से लगभग 9.3 बिलियन क्यूबिक फीट प्रति दिन (Bcf/d) एलएनजी का निर्यात किया, जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने लगभग 0.7 बिलियन क्यूबिक फीट प्रति दिन का निर्यात किया ।
एलएनजी गैस को तरल रूप में परिवर्तित करने की प्रक्रिया है, जिसके परिवहन में 600 गुना कम जगह लगती है, और फिर गंतव्य पर पहुंचने पर इसे वापस गैस में परिवर्तित कर दिया जाता है जिसका उपयोग हीटिंग, खाना पकाने और बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।
होर्मुज मध्य पूर्व से उर्वरक निर्यात का भी एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां उत्पादन प्रक्रिया में प्राकृतिक गैस का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। विश्व के उर्वरक व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा सामान्यतः इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
और विपरीत दिशा में देखें तो, यह जलडमरूमध्य मध्य पूर्व में आयात के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसमें भोजन, दवाएं और तकनीकी आपूर्ति शामिल हैं।

सामान्य परिस्थितियों में कोई देश इसे पूरी तरह “बंद” नहीं कर सकता। लेकिन व्यावहारिक रूप से बाधित (disrupt) ज़रूर कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है ?
इसका मुख्य आधार है United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS)
● यहाँ लागू होता है : Transit Passage Right
इसका अर्थ है कि सभी देशों के जहाज (यहाँ तक कि युद्धपोत भी) बिना रोक-टोक गुजर सकते हैं तटीय देश (जैसे ईरान और ओमान) इसे पूरी तरह बंद नहीं कर सकते।
फिर भी कोई देश “बाधा” कैसे डाल सकते हैं?
1.सैन्य तनाव / युद्ध
अर्थात कानूनी रूप से बंद नहीं, लेकिन व्यावहारिक रूप से बाधित किया जा सकता है
क्या कोई अपवाद भी हैं? (जिस स्थिति में किया जा सकता है ?)
अगर कोई देश बंद करे तो क्या होगा ?
भारत पर प्रभाव?
इसलिए भारत : Strategic oil reserves बनाता ऐ और Alternative routes (जैसे चाबहार) विकसित कर रहा है।
“UNCLOS के तहत अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य को बंद करना अवैध है, परंतु भू-राजनीतिक तनाव के कारण इसे बाधित किया जा सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा और व्यापार प्रभावित होता है।”



इसलिए इसे “विश्व ऊर्जा की जीवन रेखा” कहा जाता है।
सामरिक (Geopolitical) महत्व
भारत के लिए महत्व
चुनौतियाँ
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से क्या प्रभाव पड़ेगा ?
विश्व की कुल तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।एनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष औसतन प्रतिदिन 20 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल, कंडेनसेट और ईंधन जलडमरूमध्य से होकर गुजरा।
ओपेक के सदस्य देश सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक अपने कच्चे तेल का अधिकांश निर्यात इसी जलडमरूमध्य के माध्यम से मुख्य रूप से एशिया को करते हैं। कतर, जो विश्व के सबसे बड़े द्रवीकृत प्राकृतिक गैस निर्यातकों में से एक है, अपनी लगभग पूरी एलएनजी इसी जलडमरूमध्य के माध्यम से भेजता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य कब – कब बंद हुआ?
हालाँकि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का पूर्ण रूप से बंद होना इतिहास में कभी नहीं हुआ है, लेकिन इस क्षेत्र ने कई महत्त्वपूर्ण व्यवधानों और तनावपूर्ण घटनाओं को अवश्य देखा है।
ईरान-इराक युद्ध (1980-88) के दौरान, दोनों पक्षों ने खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों और मालवाहक ज़हाजों पर हमला किया, जिसे टैंकर युद्ध कहा गया।
2019 में ईरान ने एक ब्रिटिश टैंकर को ज़ब्त किया था और वह भौगोलिक-राजनीतिक तनावों के दौरान, विशेष रूप से 2011–12 में और 2018 के बाद अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते, बार-बार हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने की धमकी देता रहा है।
वैकल्पिक मार्ग और पाइपलाइनें : सऊदी अरब (ARAMCO के माध्यम से) और संयुक्त अरब अमीरात ने ऐसी पाइपलाइनें विकसित की हैं, जो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को दरकिनार कर देती हैं। वहीं ईरान गोहरे-जास्क पाइपलाइन और जास्क टर्मिनल का उपयोग कर सीधे ओमान की खाड़ी में तेल निर्यात करता है।
निष्कर्ष
होर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक भौगोलिक मार्ग नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का केंद्र है। भारत को संतुलित कूटनीति, वैकल्पिक मार्ग और ऊर्जा विविधीकरण पर ध्यान देना चाहिए।
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